सच्ची और अच्छी बाते हर एक के तबीयत के, मुताबिक नहीं हूँ,कड़वा जरूर हूँ , मगर मुनाफिक नहीं हूँ तक़दीर के लिखे पर कभी शिकायत ना कर ऐ इंशा ,तू इतना समझदार नहीं, कि रब के इरादे को समझ सकें गुजर जाएगा ये दौर भी जरा सब्र तो रखिएजब खुशी नहीं ठहरी तो ग़म की क्या औकात है । Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Like Loading... Related Leave a comment Cancel reply Δ
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